तकनीक, डेटा और संचार
हम यानों को कैसे ट्रैक करते हैं, उनसे संपर्क कैसे होता है और आँकड़ों का अर्थ क्या है।
NASA इतनी दूर यान की स्थिति कैसे जानता है?
डीप स्पेस नेटवर्क के रेडियो ट्रैकिंग से। संकेत यात्रा समय दूरी और डॉप्लर बदलाव गति की जानकारी देता है।
इन अवलोकनों को प्रक्षेप-पथ मॉडल से मिलाया जाता है। वेबसाइट परिणामी JPL Horizons इफेमेरिस उपयोग करती है।
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क्या ट्रैकर की बदलती संख्याएँ लाइव टेलीमेट्री हैं?
नहीं। ब्राउज़र सहेजे गए NASA/JPL प्रक्षेप-पथ डेटा के समय बिंदुओं के बीच इंटरपोलेशन करता है। नए रेडियो संपर्क के बिना भी मान लगातार बदल सकते हैं।
डेटा की तारीख और गणना का वर्तमान समय अलग बातें हैं।
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Voyager का संदेश पृथ्वी तक कैसे पहुँचता है?
यान मुख्य एंटीना से रेडियो सूचना भेजता है। पृथ्वी पर डीप स्पेस नेटवर्क के बड़े एंटीना उसे प्राप्त करते हैं।
आदेश विपरीत दिशा में जाते हैं और मुख्य एंटीना का सही दिशा में रहना संचालन का महत्वपूर्ण भाग है।
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उत्तर आने में इतना समय क्यों लगता है?
रेडियो संकेत निर्वात में प्रकाश की गति से चलते हैं, फिर भी अंतरग्रहीय दूरी तुरंत पार नहीं होती। आदेश पहले यान तक जाता है और उत्तर वापस आता है।
ट्रैकर एकतरफ़ा और आने-जाने का प्रकाश समय दिखाता है; संचालन की प्रतीक्षा इसमें शामिल नहीं।
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Voyager को बिजली कहाँ से मिलती है?
हर यान के तीन रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर प्लूटोनियम‑238 की गर्मी को बिजली में बदलते हैं। इनमें सौर पैनल नहीं हैं।
उपलब्ध बिजली धीरे घटती है और उसे उपकरणों, संचार, हीटर तथा अन्य तंत्रों में बाँटना पड़ता है।
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अब नई तस्वीरें क्यों नहीं आतीं?
दूसरे वैज्ञानिक उपकरणों के लिए बिजली और मेमोरी बचाने को कैमरे बंद किए गए और नियंत्रण सॉफ्टवेयर हटाया गया। Voyager 1 की अंतिम तस्वीरें 1990 की हैं।
गैलरी में अभिलेख चित्र या पुराने डेटा का नया प्रसंस्करण है, लाइव कैमरा दृश्य नहीं।
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पृथ्वी से दूरी कभी घटती क्यों है?
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। वर्ष के कुछ हिस्से में उसकी गति यान की ओर होती है और दोनों की दूरी थोड़ी घट सकती है, भले यान सूर्य से दूर जा रहा हो।
इसीलिए सूर्य-सापेक्ष गति और पृथ्वी से दूरी की बदलाव दर अलग दिखाई जाती हैं।
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क्या Voyager की दूर से मरम्मत हो सकती है?
कुछ समस्याएँ सॉफ्टवेयर या संचालन विधि बदलकर टाली जा सकती हैं, पर कोई भौतिक पुर्जा बदला नहीं जा सकता। अप्रैल 2024 में टीम ने Voyager 1 का कोड दूसरी मेमोरी जगह पर ले जाकर इंजीनियरिंग डेटा लौटाया।
हर खराबी पृथ्वी से ठीक हो सके, यह जरूरी नहीं।
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