वॉयेजर की खोजों की कहानियाँ

आयो: पृथ्वी से दूर ज्वालामुखीय गुबार

1979 में वॉयेजर 1 ने बृहस्पति के चंद्रमा आयो पर विस्फोट की तस्वीर ली। यह पृथ्वी के बाहर सक्रिय ज्वालामुखी का पहला अवलोकन था।

2026-09-24 · NASA/JPL

आयो के किनारे से ऊपर उठते ज्वालामुखीय गुबार की वॉयेजर 1 तस्वीर
वॉयेजर 1, 4 मार्च 1979। आयो के किनारे से काला गुबार ऊपर उठ रहा है। श्रेय: NASA/JPL।
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तस्वीर में क्या दिखता है

वॉयेजर 1 ने यह तस्वीर 4 मार्च 1979 को बृहस्पति के सबसे निकट पहुँचने से लगभग बारह घंटे पहले ली थी। आयो के किनारे से फव्वारे जैसा काला गुबार 100 किलोमीटर से अधिक ऊँचाई तक उठता दिखता है। किनारे के ऊपर उसका होना बताता है कि पदार्थ सतह से निकला था, यह केवल कोई काला धब्बा नहीं था।

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खोज की पुष्टि कैसे हुई

बाद की तस्वीरों में और विस्फोट दिखे, जबकि अवरक्त मापों ने ज्वालामुखीय गतिविधि से जुड़े असामान्य रूप से गर्म क्षेत्र पहचाने। सौर मंडल के किसी दूसरे पिंड पर सक्रिय विस्फोट पहली बार देखा गया था। इससे सवाल उठा कि इतने छोटे चंद्रमा को ऊर्जा कहाँ से मिलती है।

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आयो अब भी सक्रिय क्यों है

बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण और यूरोपा तथा गेनीमीड के खिंचाव आयो की कक्षा को थोड़ा दीर्घवृत्ताकार बनाए रखते हैं। हर परिक्रमा में चंद्रमा बार-बार मुड़ता है और भीतर से गर्म होता है। यही ज्वारीय ऊष्मा उसके ज्वालामुखियों को ऊर्जा देती है।