चार विशाल ग्रह

ग्रहों पर Voyager की खोजें

जुड़वाँ यानों ने वलयों, वायुमंडलों, चुंबकीय क्षेत्रों और सक्रिय उपग्रहों से भरे गतिशील ग्रहीय तंत्र उजागर किए।

तथ्य 30 अगस्त 2026 को सत्यापित · NASA — Voyager Fact Sheet

Voyager 2 द्वारा खींचा नेपच्यून और ग्रेट डार्क स्पॉट
अगस्त 1989 में नेपच्यून ने Voyager 2 की ग्रहीय यात्रा पूरी की। चित्र: NASA/JPL।
दो मार्ग

साझा मिशन, अलग अवसर

दोनों यान बृहस्पति और शनि के लिए बने थे। Voyager 1 ने टाइटन की बहुत निकट उड़ान को प्राथमिकता दी और फिर ग्रहों के तल से बाहर चला गया। Voyager 2 ने यूरेनस और नेपच्यून का मार्ग बचाए रखा। इसलिए दोनों के परिणाम एक-दूसरे की नकल नहीं, पूरक हैं। एक ने टाइटन और तेज़ अंतरतारकीय मार्ग दिया; दूसरे ने चारों विशाल ग्रहों की ग्रैंड टूर। समान उपकरणों से अलग समय और दिशा में मिले माप ग्रहों के मौसम तथा magnetosphere की विविधता भी दिखाते हैं।

बृहस्पति और शनि

सक्रिय आयो, जटिल वलय और धुँधला टाइटन

Voyager चित्रों ने आयो पर सक्रिय ज्वालामुखीय plume दिखाए—पृथ्वी के बाहर सक्रिय volcanism का पहला अवलोकन। यूरोपा की कम crater वाली टूटी बर्फीली सतह ने भीतर की गतिविधि का संकेत दिया। बृहस्पति का हल्का वलय और नए छोटे उपग्रह मिले। शनि पर कई ringlets, shepherd moons और वलयों की गतिशील संरचना दिखाई दी। टाइटन का घना nitrogen-rich वायुमंडल सतह छिपाता था, लेकिन उसकी रसायन और haze ने आगे के अभियानों के प्रश्न तय किए।

यूरेनस

झुका चुंबकीय क्षेत्र और मिरांडा की विचित्र सतह

जनवरी 1986 में Voyager 2 ने यूरेनस के दस नए उपग्रह और दो नए वलय खोजे। ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र घूर्णन धुरी से बहुत झुका और केंद्र से हटकर निकला, इसलिए उसका magnetosphere घूमते समय असामान्य रूप लेता है। मिरांडा पर विशाल घाटियाँ और अलग-अलग दिखते भूभाग मिले, जैसे सतह के टुकड़े फिर जुड़े हों। कम सूर्यप्रकाश में ली गई छवियाँ और क्षेत्र माप आज भी यूरेनस की एकमात्र निकट जाँच हैं और भविष्य के orbiter प्रस्तावों की मुख्य आधाररेखा बने हुए हैं।

नेपच्यून और ट्राइटन

तेज़ हवाएँ, नया वलय संसार और सक्रिय बर्फीला चंद्रमा

अगस्त 1989 में Voyager 2 ने नेपच्यून का Great Dark Spot, चमकीले बादल और सौरमंडल की सबसे तेज़ ज्ञात हवाओं में कुछ दर्ज कीं। उसने नए उपग्रह और वलय-चाप देखे। ट्राइटन पर नाइट्रोजन के सक्रिय geyser और युवा सतह ने दिखाया कि सूर्य से इतनी दूरी पर भी छोटा संसार भूवैज्ञानिक रूप से सक्रिय हो सकता है। ट्राइटन की निकट उड़ान ने यान को ग्रहों के तल के नीचे मोड़ दिया और Voyager कार्यक्रम की ग्रहीय खोज का अंतिम अध्याय बंद किया।

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