हेलियोस्फीयर और अंतरतारकीय अंतरिक्ष
दोनों Voyager ने अलग दिशाओं में सूर्य की प्लाज़्मा सीमा पार की, लेकिन सूर्य से गुरुत्वीय रूप से बँधी वस्तुएँ इससे बहुत आगे तक हैं।
तथ्य 30 अगस्त 2026 को सत्यापित · NASA — Interstellar Science

हेलियोस्फीयर स्थिर गोला नहीं है
सौर पवन आवेशित कण और चुंबकीय क्षेत्र बाहर ले जाकर हेलियोस्फीयर बनाती है। उसकी आकृति और सीमा सौर गतिविधि तथा आसपास के अंतरतारकीय माध्यम के दबाव से बदलती है। termination shock पर अतिध्वनिक सौर पवन धीमी होती है; उसके और heliopause के बीच heliosheath है। हेलियोपॉज़ वह सीमा है जहाँ बाहर का अंतरतारकीय plasma प्रभाव प्रमुख हो जाता है। मानचित्र में इसकी रेखा केवल सांकेतिक है, क्योंकि वास्तविक सीमा समय और दिशा के साथ बदलती रहती है।
termination shock और heliopause
Voyager 1 ने 16 दिसम्बर 2004 को termination shock और 25 अगस्त 2012 को heliopause पार किया। Voyager 2 ने shock 30 अगस्त 2007 और heliopause 5 नवम्बर 2018 को पार किया। तारीखों और दूरियों का अलग होना केवल यानों की अलग गति का परिणाम नहीं; वे अलग दिशाओं में गए और बदलती सौर परिस्थितियों में सीमा तक पहुँचे। संयुक्त माप दिखाते हैं कि सीमा पूरी तरह सममित या स्थिर नहीं है।
कण, चुंबकीय क्षेत्र और प्लाज़्मा घनत्व
Voyager 1 का plasma instrument उपलब्ध नहीं था, इसलिए टीम ने heliospheric particles में तेज़ कमी, galactic cosmic rays में वृद्धि और magnetic field के व्यवहार को देखा। plasma-wave मापों ने बाद में बाहरी अधिक घने plasma की विशेष आवृत्ति दिखाई और पुष्टि की कि अगस्त 2012 में सीमा पार हुई थी। विज्ञान में एक संकेत के बजाय कई स्वतंत्र मापों का मेल महत्त्वपूर्ण था; इसी कारण आधिकारिक घोषणा डेटा के सावधान विश्लेषण के बाद आई।
सीधा प्लाज़्मा मापन, पर गुरुत्वीय किनारा नहीं
Voyager 2 के काम करते PLS ने 5 नवम्बर 2018 को सौर पवन के flow में तेज़ गिरावट और फिर उसका गायब होना सीधे मापा। heliopause पार करना plasma परिभाषा के अनुसार अंतरतारकीय अंतरिक्ष में प्रवेश है। फिर भी ऊर्ट बादल बहुत आगे है; NASA उसके अंदरूनी किनारे तक पहुँचने में सदियाँ और पूरा पार करने में दसियों हजार वर्ष बताता है। इसलिए “सौरमंडल से बाहर” कहने से पहले बताना जरूरी है कि बात सौर पवन की सीमा की है या सूर्य के गुरुत्वीय परिवार की।
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